कैपिटल गेन पर टैक्स कैसे बचाये ? – section 54 of income tax act in hindi

कैपिटल गेन पर टैक्स कैसे बचाये ? – section 54 of income tax act in hindi

section 54 of income tax act in hindi – जब भी कोई पर्सन किसी Assets को बेचता है, तो उसके सामने सबसे बड़ी समस्या उस Assets को बेचने पर होने वाली इनकम पर टैक्स चुकाने की होती है, जिसे हम कैपिटल गेन टैक्स भी कहते है।

आज भारत में अधिकतर लोगो ने पैसे प्रॉपर्टी में लगाये हुए है, ताकि इस प्रॉपर्टी को बाद में बेचकर वो एक अच्छी इनकम कर सके। लेकिन जब वो प्रॉपर्टी को sell करते है, तो उन्हें अपनी इनकम पर टैक्स की एक बड़ी राशि का भुगतान करना पड़ता है जिससे उनके हाथ में काफी कम इनकम आती है। (more…)

आप भी कोई प्रॉपर्टी बेच रहे है तो आपको पता होनी चाहिए कुछ जरुरी चीजे  – Property tax in hindi

आप भी कोई प्रॉपर्टी बेच रहे है तो आपको पता होनी चाहिए कुछ जरुरी चीजे – Property tax in hindi

Property tax in hindi – भारत में इनकम टैक्स डिपार्टमेंट से सबसे अधिक नोटिस प्रॉपर्टी में ट्रांजेक्शन करने वाले लोगो को ही जारी किये जाते है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि प्रॉपर्टी में ट्रांजेक्शन करना गलत है। प्रॉपर्टी ट्रांजेक्शन में इनकम टैक्स नोटिस अधिक आने की मुख्य वजह यह है कि जब भी कोई पर्सन किसी प्रॉपर्टी को सेल करता है तो उसे अपनी इनकम टैक्स रिटर्न में नहीं दिखाता है और न ही उस पर कोई टैक्स जमा करवाता है।

लेकिन बाद में जब यह ट्रांजेक्शन इनकम आयकर विभाग के पकड़ में आता है, तो वह उस पर्सन को नोटिस जारी कर देता है और जमा नहीं करवाए गए टैक्स को इंटरेस्ट और पेनल्टी के साथ जमा करवाने की मांग करता है। इन ट्रांजेक्शन पर पेनल्टी की राशि काफी ज्यादा होती है, इसलिए इन ट्रांजेक्शन को समय पर रिपोर्ट करना चाहिए।



अगर आप भी कोई प्रॉपर्टी ( चाहे बिल्डिंग हो या कोई जमीन ) बेचने की सोच रहे है, तो आपको भी कुछ इनकम टैक्स के कुछ नियमो का पता होना चाहिये।  इन नियमो के बारे में हम आज के आर्टिकल Property tax in hindi में चर्चा करेंगे।

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कैपिटल गेन टैक्स क्या होता है – ( Property tax in hindi )

जब भी कोई प्रॉपर्टी ( चाहे बिल्डिंग हो या कोई जमीन ) बेचीं जाती है, तो उसे बेचने पर जो प्रॉफिट होता है वह कैपिटल गेन कहलाता है और यदि बेचने पर कोई loss होता है तो वह कैपिटल loss होता है।

प्रॉपर्टी को बेचने पर होने वाला कैपिटल गेन टैक्सेबल होता है जिसे हम कैपिटल गेन हेड के अंतर्गत रिपोर्ट करते है। कैपिटल गेन पर टैक्स की गणना करने से पहले हम उसे लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन ( LTCG ) और शार्ट टर्म कैपिटल गेन ( STCG ) में बाँटते है। कैपिटल गेन को लॉन्ग टर्म और शार्ट टर्म में इसलिए अलग किया जाता है क्योकि इन दोनों पर टैक्स की कैलकुलेशन और रेट्स अलग – अलग होती है।

कैपिटल गेन का शार्ट टर्म कैपिटल गेन और लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन में वर्गीकरण प्रॉपर्टी को हमने कितने समय तक अपने पास रखा पर depend करता है।

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टाइम लिमिट

कोई प्रॉपर्टी  ( चाहे बिल्डिंग हो या कोई जमीन ) यदि 1 अप्रैल 2017 के बाद ट्रांसफर की गयी है तो उसको धारित ( Hold ) करने की अवधि यदि 24 महीनो से अधिक है, तो वह लॉन्ग टर्म कैपिटल एसेटस कहलायेगी और यदि 1 अप्रैल 2017 से पहले ट्रांसफर की गई है तो वह 36 महीनो से अधिक धारित ( Hold ) की जाती है तो लॉन्ग टर्म कैपिटल एसेट्स मानी जायेगी।

शार्ट टर्म कैपिटल एसेटस वह एसेट्स होती है जो कि लॉन्ग टर्म कैपिटल एसेट्स नहीं है। जब भी लॉन्ग टर्म एसेटस को बेचा जाता है तो लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन/ loss और यदि शार्ट टर्म कैपिटल एसेटस को बेचा जाता है तो शार्ट कैपिटल कैपिटल गेन / loss होता है।

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calculation of capital gain on sell of property

जब भी कोई  पर्सन किसी प्रॉपर्टी को ट्रांसफर करता है तो वह उस ईयर में टैक्सेबल होता है जिस ईयर में वह ट्रांजेक्शन हुआ था। इस ट्रांजेक्शन पर कैपिटल गेन कैलकुलेट करने के लिए आपको निम्न कैलकुलेशन करनी होगी –

Short term capital gain Amount Long term capital gain Amount
Sale Consideration *** Sale Consideration ***
Less : (1) Expenses on transfer *** Less : (1) Expenses on transfer ***
(2) Cost of acquisition *** (2) Indexed Cost of acquisition ***
(3) Cost of improvement *** (3) Indexed Cost of Improvement ***
Net consideration *** Net consideration ***
Less: Exemption ( If any) *** Less: Exemption ( If any) ***
Taxable Capital Gain *** Taxable Capital Gain ***

 

शार्ट टर्म कैपिटल गेन और लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन की कैलकुलेशन में अंतर सिर्फ इतना है कि लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन में हम कॉस्ट ऑफ़ acquisition और कॉस्ट ऑफ Improvement का इंडेक्सेशन करते है।



कैपिटल गेन की कैलकुलेशन को समझने के लिए हम एक उदाहरण देखते है –

मान लीजिये आपने एक साल पहले कोई प्रॉपर्टी 10 लाख में खरीदी थी, जिस पर आगे कुछ सुधार के लिए आपने 2 लाख रुपये और खर्च किये। अब आप इस प्रॉपर्टी को 18 लाख रुपये में बेच रहे है और बेचने पर आपको 1 लाख के खर्चे और हो रहे है, तो इस केस में कैपिटल गेन की कैलकुलेशन होगी –

Particular Amount
Sale consideration 18,00,000
Less : expenses on sale 1,00,000
Cost of acquisition 10,00,000
Cost of improvement 2,00,000
Net consideration 5,00,000
Less : Exemption ( If Any)     –
Taxable capital gain 5,00,000 

 

इस केस में आपका 5 लाख रुपये का शार्ट टर्म कैपिटल गेन आया जिस पर आपको आपके स्टेटस के हिसाब से टैक्स देना होगा यानि यदि आप एक कंपनी या फर्म है तो 30 % और अगर आप एक इंडिविजुअल या HUF है तो यह अमाउंट आपकी स्लैब रेट में जुड़ जायेगा और उसके हिसाब से टैक्स लगेगा।

यदि इस केस में लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन हुआ होता तो टैक्स की राशि 20 % होती।  टैक्सेबल कैपिटल गेन में से आपको 80 सी की कोई भी डिडक्शन नहीं दी जायेगी।

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Loss होने पर क्या करे ?

यह जरुरी नहीं है की किसी प्रॉपर्टी को बेचने पर हमें प्रॉफिट ही हो, इसमें नुकसान भी हो सकता है। यदि प्रॉपर्टी को बेचने पर हमें नुकसान हो रहा है तो इसको आप इनकम टैक्स रिटर्न में जरूर दिखाए ताकि इस loss को आप किसी अन्य कैपिटल गेन से सेट ऑफ कर सके।

यदि उस ईयर में कोई और टैक्सेबल कैपिटल गेन नहीं है तो आप इसे आगे Carry Forward कर सकते है जिससे भविष्य में होने वाले कैपिटल गेन से सेट ऑफ कर सकते है। कैपिटल loss को आगे Carry Forward करने के लिए आपको समय पर इनकम टैक्स रिटर्न भरना बहुत जरुरी है अन्यथा आप इसे Carry Forward नहीं कर पायेंगे।

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धन्यवाद।

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Capital Gains Tax India in hindi

Capital Gains Tax India in hindi

Capital gains Tax India in hindi

Capital Gains Tax India in hindi – Capital Gain क्या होता है और Capital Gains पर टैक्स किस प्रकार से लगाया जाता है इसके बारे में अधिकतर लोग अनभिज्ञ रहते है और जब वे कोई प्रॉपर्टी बेचते है, तो इस पर Capital Gains Tax जमा नहीं करवाते है। लेकिन जब इनकम टैक्स डिपार्टमेंट से नोटिस आता है, तो उन्हें इस बारे में पता चलता है और तब तक उनकी टैक्स राशि पर Interest और Penalty लग चुकी होती है (more…)

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