reverse charge gst meaning in hindi – सामान्य तौर पर जीएसटी सिस्टम में गुड्स एंड सर्विसेज के सप्लायर द्वारा गवर्नमेंट को जीएसटी का भुगतान किया जाता है। एक टैक्सेबल पर्सन गुड्स एंड सर्विसेज के Purchaser से जीएसटी कलेक्ट करता है और उसका गवर्नमेंट को भुगतान करता है।

लेकिन जीएसटी सिस्टम में कुछ केसेस ऐसे भी जहाँ गुड्स एंड सर्विसेज के सप्लायर द्वारा गवर्नमेंट को जीएसटी का भुगतान न किया जाकर गुड्स एंड सर्विसेज के प्राप्तकर्ता द्वारा किया जाता है। इसी प्रोसेस को रिवर्स चार्ज मैकेनिज्म के तौर पर जाना जाता है। आज के इस आर्टिकल में हम जीएसटी सिस्टम में रिवर्स चार्ज के सभी Provisions के बारे में जानेंगे।



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रिवर्स चार्ज क्या है – What is reverse charge under gst meaning in hindi

रिवर्स चार्ज में जीएसटी का भुगतान सप्लायर द्वारा न किया जाकर गुड्स एंड सर्विसेज के प्राप्तकर्ता द्वारा किया जाता है। रिवर्स चार्ज के लागू होने के कारण जीएसटी का भुगतान प्राप्तकर्ता द्वारा किया जाता है तो जीएसटी एक्ट के सभी प्रावधान भी गुड्स एंड सर्विसेज के प्राप्तकर्ता पर ही लागू होते है। रिवर्स चार्ज को एक उदाहरण से समझते है –

Mr A ने Mr B को Rs. 1,00,000 का गुड्स सेल किया। जीएसटी के नार्मल Provisions के हिसाब से Mr A द्वारा Mr B से जीएसटी लिया जायेगा और आगे गवर्नमेंट को पेमेंट किया जायेगा।  लेकिन इस केस में अगर रिवर्स चार्ज लागु होता तो Mr B द्वारा Mr A को जीएसटी का पेमेंट करने के बजाय सीधा गवर्नमेंट को भुगतान किया जाता।

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केसेस जहाँ Reverse Charge मैकेनिज्म लागू होगा –

  1. यदि आप एक रजिस्टर्ड पर्सन है और किसी Unregistered पर्सन से गुड्स एंड/ या सर्विसेज या दोनों प्राप्त करते है, तो इस केस में रिवर्स चार्ज लागू होगा और जीएसटी का पेमेंट आपके द्वारा किया जायेगा। लेकिन आपके द्वारा जीएसटी का पेमेंट नहीं किया जायेगा यदि कुल सप्लाइज एक दिन में 5000 से अधिक नहीं है।
  2. भारत के बाहर से सर्विसेज को Import करने पर रिवर्स चार्ज लागू होगा। सर्विसेज को Import करना inter state sale माना जाता है इसलिए इस पर IGST Payable होगा।
  3. गुड्स ट्रांसपोर्ट एजेंसी ( GTA ) द्वारा स्पेसिफ़िएड पर्सन को सड़क मार्ग द्वारा गुड्स की सप्लाई।
  4. एडवोकेट या एडवोकेट फर्म द्वारा किसी बिज़नेस entities को सर्विसेज प्रदान करना।
  5. Arbitral Tribunal द्वारा बिज़नेस Entities को सर्विसेज प्रदान करना।
  6. किसी भी पर्सन द्वारा बॉडी कॉर्पोरेट या पार्टनरशिप फर्म को स्पोंसरशिप की सेवायें  प्रदान करना।
  7. कंपनी के डायरेक्टर द्वारा कंपनी को प्रदान सेवायें।
  8. बीमा एजेंट द्वारा बीमा कंपनी को प्रधान सेवायें।
  9. रिकवरी एजेंट द्वारा बैंकिंग कंपनी, फाइनेंसियल institution, nbfc को प्रदान सेवायें।

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रजिस्ट्रेशन रूल्स Under reverse charge

रिवर्स चार्ज में गुड्स एंड सर्विसेज के प्राप्तकर्ता को जीएसटी का भुगतान करना पड़ता है, इसलिये प्राप्तकर्ता द्वारा जीएसटी एक्ट में रजिस्ट्रेशन करवाना अनिवार्य होता है। रिवर्स चार्ज में गुड्स एंड सर्विसेज के प्राप्तकर्ता पर minimum टर्नओवर की सीमा लागू नहीं होती है यानि की प्राप्तकर्ता को 20 लाख से कम टर्नओवर होने पर भी रजिस्ट्रेशन करवाना पड़ेगा।

रिवर्स चार्ज के केस में जहाँ पूरा टैक्स का भुगतान गुड्स एंड सर्विसेज के प्राप्तकर्ता द्वारा किया जाता है, तो इस केस में सप्लायर को रजिस्ट्रेशन करवाना अनिवार्य नहीं होता है।

इनपुट टैक्स क्रेडिट अंडर रिवर्स चार्ज

रिवर्स चार्ज लागू होने के कारण जीएसटी का पेमेंट गुड्स एंड सर्विसेज के प्राप्तकर्ता द्वारा किया जाता है, तो प्राप्तकर्ता भुगतान किये गए जीएसटी की इनपुट टैक्स क्रेडिट प्राप्त कर सकता है। इनपुट टैक्स क्रेडिट प्राप्त करने के लिए जीएसटी का पेमेंट किया जाना आवश्यक है।

गुड्स एंड सर्विसेज के प्राप्तकर्ता द्वारा जीएसटी का पेमेंट cash में किया जायेगा न कि पहले से उपलब्ध इनपुट टैक्स क्रेडिट को utilize करके।

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टाइम ऑफ़ सप्लाई

In the case of goods – जीएसटी सिस्टम में गुड्स की सप्लाई पर जीएसटी लगाया जाता है, इसलिए टैक्सेशन के लिए सप्लाई का टाइम पता होना बहुत जरुरी है। गुड्स की सप्लाई का टाइम निम्न में से जो भी पहले होगा माना जायेगा –

  1. गुड्स की प्राप्ति या
  2. भुगतान की तारीख या
  3. सप्लायर द्वारा जारी किये गए इनवॉइस के 30 दिनों के तुरंत बाद की तारीख।

इन तीनो में जो भी पहले की तारीख होगी वह सप्लाई की तारीख मानी जाएगी और अगर इन तीनो से सप्लाई का टाइम निकालना संभव नहीं है तो प्राप्तकर्ता के बुक्स ऑफ़ एकाउंट्स में एंट्री किये जाने की तारीख़ को गुड्स की सप्लाई की तारीख माना जायेगा।

In the case of Services –  सर्विसेज की सप्लाई का टाइम निम्न में से जो भी पहले होगा माना जायेगा –

  1. सर्विसेज के भुगतान की तारीख या
  2. सप्लायर द्वारा जारी किये गए इनवॉइस के 60 दिनों के तुरंत बाद की तारीख।

इन तीनो में जो भी पहले की तारीख होगी वह सप्लाई की तारीख मानी जाएगी और अगर इन तीनो से सप्लाई का टाइम निकालना संभव नहीं है तो प्राप्तकर्ता के बुक्स ऑफ़ एकाउंट्स में एंट्री किये जाने की तारीख़ को गुड्स की सप्लाई की तारीख माना जायेगा।

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डेट ऑफ़ पेमेंट

सप्लाई की डेट निकालने के लिए गुड्स या सर्विसेज अथवा दोनों के भुगतान की डेट का निकालना जरुरी है। गुड्स या सर्विसेज अथवा दोनों के भुगतान की डेट निम्न में से जो भी पहले होगी मानी जाएगी –

  1. बैंक अकाउंट से पेमेंट के डेबिट किये जाने की डेट या
  2. प्राप्तकर्ता द्वारा बुक्स में एंट्री किये जाने की डेट।
रिवर्स चार्ज के अन्य इम्पोर्टेन्ट पॉइंट्स
  1. करमुक्त गुड्स एंड सर्विसेज के केस में रिवर्स चार्ज मैकेनिज्म लागू नहीं होगा।
  2. Unregistered पर्सन के द्वारा स्टेट के भीतर गुड्स एंड सर्विसेज की सप्लाई किसी रजिस्टर्ड पर्सन को करने पर ही रिवर्स चार्ज मैकेनिज्म लागु होगा, क्योकि Unregistered पर्सन को स्टेट के बाहर गुड्स एंड सर्विसेज की सप्लाई करने पर जीएसटी में रजिस्टर्ड करवाना आवश्यक होगा और रजिस्टर्ड पर्सन के केस में रिवर्स चार्ज मैकेनिज्म लागू नहीं होगा।
  3. रिवर्स चार्ज मैकेनिज्म कम्पोजीशन स्कीम में रजिस्टर्ड पर्सन पर भी लागू होगा लेकिन इस केस में उन्हें इनपुट टैक्स क्रेडिट प्राप्त नहीं होगी।
  4. कोई भी पर्सन जो की रजिस्टर्ड नहीं है और न ही रजिस्ट्रेशन करवाने की आवश्यकता है, उसे रिवर्स चार्ज मैकेनिज्म के आधार पर जीएसटी का पेमेंट करने की आवश्यकता नहीं है।

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