What Is Advance Tax in Hindi – यदि आपके द्वारा 1 वर्ष में Rs. 10,000 या अधिक का टैक्स Payable है, तो आप एडवांस टैक्स के दायरे में आ जायेंगे और आपके द्वारा एडवांस टैक्स का पेमेंट किया जाना जरुरी हो जायेगा।

What Is Advance Tax in hindi

एडवांस टैक्स इनकम टैक्स का ही पार्ट होता है जो कि उसी वर्ष में पेयबल होता है जिस वर्ष में आपकी इनकम होती है यानि जैसे -जैसे आप कमाते हो वैसे उस इनकम पर टैक्स का भुगतान भी करना पड़ेगा।

आपकी एडवांस टैक्स की लायबिलिटी तब होती है जब आपके द्वारा Rs.10,000 या उससे अधिक का टैक्स Payable होता है।

एडवांस टैक्स की कैलकुलेशन के लिए सबसे पहले आपकी होने वाली इनकम (Estimate Income ) का अनुमान लगाया जाता है और उस इनकम पर स्लैब रेट के हिसाब से टैक्स की कैलकुलेशन की जाती है।

कैलक्युलेटेड टैक्स में से टीडीएस, TCS, रिबेट और रिलीफ ( सेक्शन 87 A, 89, 90, 90A, 91) को घटा दिया जाता है और बैलेंस टैक्स की राशि यदि Rs. 10,000 या उससे अधिक है तो आपको एडवांस टैक्स जमा करवाना पड़ेगा।

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आपके द्वारा एडवांस टैक्स का भुगतान 4 किस्तों में किया जायेगा। इन किस्तों का समय पर भुगतान नहीं करने या कम भुगतान करने पर सेक्शन 234 बी & 234 सी में इंटरेस्ट का भुगतान करना पड सकता है।

लेकिन आपके द्वारा एडवांस टैक्स का भुगतान नहीं किया जायेगा यदि आपकी उम्र 60 वर्ष या अधिक है व आप भारत में निवासी है और आपकी इनकम में बिज़नेस & प्रोफेशन की इनकम शामिल नहीं है।

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Due Dates & Amount Payable of Advance Tax

एडवांस टैक्स का भुगतान करने के लिए करदाता को दो भागो में डिवाइड किया गया है (1 ) सेक्शन 44 AD में शामिल करदाता को छोड़ते हुए सभी करदाता (2 ) सेक्शन 44 AD के करदाता

  1. सेक्शन 44 AD में शामिल करदाता को छोड़ते हुए सभी करदाता ( Corporate & Non Corporate Assessees)

Due Dates of Installment

Amount Payable

On or Before 15th June

15 % of Advance Tax Liability
On or Before 15th september 45 % of Advance Tax Liability
On or Before 15th december 75 % of Advance Tax Liability
On or Before 15th march 100 % of Advance Tax Liability

 

2.  सेक्शन 44 AD के करदाता

On or Before 15th march 100 % of Advance Tax Liability

Note : 31 मार्च तक चुकाए गए एडवांस टैक्स को उसी फाइनेंसियल ईयर में चुकाया गया माना जायेगा।


Order of Assessing Officer – करनिर्धारण अधिकारी द्वारा आर्डर

  1. यदि आपके द्वारा एडवांस टैक्स का भुगतान नहीं किया जाता या कम भुगतान किया जाता है तो करनिर्धारण अधिकारी (A .O .) द्वारा सेक्शन 210 में आपको एडवांस टैक्स का भुगतान करने का आर्डर जारी किया जा सकता है।
  2. आपके द्वारा आर्डर जारी किये जाने के बाद भी भुगतान नहीं किया जाता तो आपको चूक में करदाता (Assessee In Default ) माना जायेगा।
  3. A.O. द्वारा यह आर्डर फ़रवरी की लास्ट डेट तक जारी किया जा सकता है।
  4. आर्डर में एडवांस टैक्स की कैलकुलेशन A.O.द्वारा की जाती है जो कि आपकी पहले कि Assessed/Returned इनकम के आधार पर होती है।
  5. लेकिन A.O. की एडवांस टैक्स की कैलकुलेशन अधिक है तो आपके द्वारा A.O. को फॉर्म 28 A में इंटिमेशन दिया जा सकता है।

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Interest U/S 234 B

यदि आपके द्वारा गत वर्ष में कुल “Assessed Tax ” के 90 % से कम एडवांस टैक्स का पेमेंट किया जाता है या एडवांस टैक्स का पेमेंट ही नहीं किया जाता तो आप सेक्शन 234 बी में इंटरेस्ट के भुगतान के लिए दायी होंगे, जो कि 1 % प्रति महीना के हिसाब से दिया जायेगा।

Interest U/S 234 C

आपके द्वारा गत वर्ष में एडवांस टैक्स की Installment  में चूक करने या किसी Installment में कम भुगतान करने पर 1 % का इंटरेस्ट लगाया जायेगा।

लेकिन 1st और 2nd Installment में न्यूनतम 12 % और 36 % का भुगतान करते है तो इंटरेस्ट नहीं लगाया जायेगा।

No Interest

जब आपके द्वारा इनकम को कम अनुमानित या अनुमानित नहीं करने की वजह से किसी Installment में कम भुगतान या भुगतान नहीं किया जाता तो आपके ऊपर इंटरेस्ट नहीं लगाया जायेगा। ऐसी इनकम हो सकती है –

  1. Capital Gain
  2. Income जो कि Lotteries, Crossword Puzzles, Card Games, Gambling, Races से होती है
  3. यदि पहली बार PGBP हेड के अंतर्गत कोई इनकम हो रही है।

लेकिन इंटरेस्ट उस केस में ही नहीं लगाया जायेगा जब आपकी इनमे से कोई इनकम हो और बैलेंस Installment में पुरे टैक्स का भुगतान किया जाये। यदि कोई Installment शेष नहीं है तो फाइनेंसियल ईयर के 31 मार्च तक टैक्स का भुगतान किया जाये।

Other Important Points

  1. इंटरेस्ट की कैलकुलेशन के लिए महीने के पार्ट को फुल Month माना जायेगा।
  2. टैक्स अमाउंट को 100 के मल्टीपल में Rounded ऑफ किया जायेगा और फ्रैक्शन राशि को छोड़ दिया जायेगा।
  3. इंटरेस्ट की कैलकुलेशन आपके द्वारा स्वयं की जाएगी और उसको टैक्स के साथ जमा करवाया जायेगा।

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