what is gratuity meaning in hindi – ग्रेच्युटी एक तरह से कर्मचारियों के लिए reward है जो कि कर्मचारियों को कंपनी में लम्बे समय के लिए काम करने के बदले में Employer द्वारा दिया जाता है। ग्रेच्युटी कर्मचारी की सैलरी में ही शामिल होती है लेकिन इसका पेमेंट Monthly न किया जाकर एक साथ किया जाता है और कुछ शर्तो के पूरा होने पर ही किया जाता है। अधिकतर कर्मचारी ग्रेच्युटी के सम्बन्ध में पूरी तरह से क्लियर नहीं होते है और ग्रेच्युटी को claim करने के लिए जरुरी शर्ते पूरी नहीं कर पाते है, इससे वे ग्रेच्युटी का लाभ नहीं उठा पाते है।


आज के आर्टिकल what is gratuity meaning in hindi में हम ग्रेच्युटी और इसके टैक्सेशन के प्रावधानों के सम्बन्ध में जानेंगे।

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ग्रेच्युटी का भुगतान करना किनके लिए अनिवार्य है  –

कोई भी संगठन जिसमे एक फाइनेंसियल ईयर में किसी भी समय 10 या 10 से अधिक कर्मचारी कार्य करते है तो ऐसा संगठन कर्मचारियों को ग्रेच्युटी का भुगतान करने के लिए क़ानूनी रूप से जिम्मेदार है। संगठन में फैक्ट्री, mine,ऑइल फील्ड, पोर्ट, रेलवे, प्लान्टेशन, Shops और सभी एजुकेशनल संस्थानों को शामिल किया गया है।

ग्रेच्युटी का भुगतान ग्रेच्युटी एक्ट 1972 के प्रावधानों के आधार पर किया जाता है। ग्रेच्युटी एक्ट उन सभी संगठनों पर लागू होगा जिनमे एक वर्ष में किसी भी समय 10 या 10 से अधिक कर्मचारी कार्य करते है। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि यदि एक बार किसी संगठन पर ग्रेच्युटी एक्ट लागू हो गया तो यह उस केस में भी लागू रहेगा जब उस संगठन में किसी वर्ष में 10 से कम कर्मचारी कार्य करते है।

कुछ एम्प्लायर स्वेच्छिक रूप से भी ग्रेच्युटी का भुगतान कर सकते है ऐसे एम्प्लॉयर्स पर ग्रेच्युटी एक्ट 1972 लागू नहीं होगा।

जिन एम्प्लायर द्वारा ग्रेच्युटी का भुगतान करना क़ानूनी रूप से अनिवार्य है उनके द्वारा भी ग्रेच्युटी के भुगतान के लिए किसी कर्मचारी को मना किया जा सकता है, यदि उस कर्मचारी की सर्विस किसी misconduct की वजह से समाप्त की जाती है।

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कर्मचारी जिन्हे ग्रेच्युटी प्राप्त करने का अधिकार है –

जिन संगठन में ग्रेच्युटी एक्ट 1972 लागू होता है उनमे भी सिर्फ उन्ही कर्मचारियों को ग्रेच्युटी का भुगतान किया जाता है जो कि ग्रेच्युटी के भुगतान के लिए आवश्यक शर्तो को पूरा करते है। ग्रेच्युटी को प्राप्त करने के लिए एक कर्मचारी तब अधिकृत होगा जब वह उस संगठन में लगातार 5 वर्षो की सेवायें प्रदान करता है। इसके अलावा ग्रेच्युटी का भुगतान Trainees/ Interns को न किया जाकर सिर्फ परमानेंट कर्मचारियों को ही किया जाता है।

5 वर्षो की लगातार सेवा उस कंडीशन में अनिवार्य नहीं होगी जब कर्मचारी की सेवा उसकी मृत्यु होने या असक्षम हो जाने पर समाप्त हुई  हो।

कैलकुलेशन ऑफ़ ग्रेच्युटी – what is gratuity meaning in hindi

ग्रेच्युटी की कैलकुलेशन के लिए कर्मचारियों को 2 पार्ट में बाँटा जाता है – (1) कर्मचारी जिन पर ग्रेच्युटी एक्ट 1972 लागू होता है, (2) कर्मचारी जिन पर ग्रेच्युटी एक्ट लागू नहीं होता है।

Formula :

  1. कर्मचारी जिन पर ग्रेच्युटी एक्ट 1972 लागू होता है –  [Last Drawn Salary * Period of Service * 15] /26

यहाँ Salary में ( बेसिक सैलरी+ dearness Allowance (DA ) ) को शामिल किया जायेगा और Period of Service में 6 महीने से अधिक पीरियड को पूरा वर्ष माना जायेगा। इसको समझने के लिए एक उदाहरण देखते है –

मान लीजिये आप किसी कंपनी में पिछले 16 वर्ष 7 महीने से काम कर रहे है और आपकी सैलरी Rs. 50,000 प्रति महीना है, तो आपकी ग्रेच्युटी की राशि होगी –  [50000 * 17 * 15]/26 = 4.90 लाख ।


2. कर्मचारी जिन पर ग्रेच्युटी एक्ट 1972 लागू नहीं होता है – [ Average Salary of last 10 Months * Completed year of service * 15] / 30

यहाँ Salary में ( बेसिक सैलरी+ dearness Allowance (If forming part of retirement benefit)+ कमिशन ऑन फिक्स्ड % ऑफ़ टर्नओवर achieved by एम्प्लोयी ) को शामिल किया जायेगा और completed year of Service में पूरे वर्ष की सेवा को 1 वर्ष माना जायेगा और 12 महीने से कम पीरियड को छोड़ दिया जायेगा, उदाहरण के लिए यदि आपने 16 वर्ष 11 महीने काम किया है तो इसे 16 वर्ष ही माना जायेगा।

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ग्रेच्युटी का भुगतान कब किया जायेगा ?

कर्मचारी द्वारा किसी संगठन में लगातार 5 वर्ष की सेवा पूरी करने के बाद ग्रेच्युटी का भुगतान किया जाता है, जो कि निम्न केस में Payable होगी –

  1. on superannuation
  2. रिटायरमेंट या त्यागपत्र देने पर
  3. मृत्य या असक्षम हो जाने पर।

ग्रेच्युटी का भुगतान कर्मचारी की सेवा समाप्त होने के 30 दिनों के भीतर किया जाना चाहिये। 30 दिनों के बाद भुगतान करने पर एम्प्लायर को इंटरेस्ट के साथ ग्रेच्युटी का पेमेंट करना पड़ता है।

कर्मचारी की मृत्य हो जाने पर ग्रेच्युटी का भुगतान उसके nominee या क़ानूनी उत्तराधिकारी को किया जायेगा। कर्मचारी अपनी जोइनिंग के टाइम पर फॉर्म F भरकर 1 या अधिक फैमिली मेंबर्स को नॉमिनी बना सकता है, जिन्हे उसकी मृत्यु होने पर ग्रेच्युटी का भुगतान किया जायेगा।

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टैक्सेशन ऑफ़ ग्रेच्युटी

ग्रेच्युटी के टैक्सेशन के लिए कर्मचारियों को 3 पार्ट में बाँटा जाता है –

    1. सरकारी कर्मचारी – सेंट्रल गवर्नमेंट, स्टेट गवर्नमेंट और लोकल अथॉरिटी के कर्मचारी को रिटायरमेंट या मृत्यु पर प्राप्त ग्रेच्युटी की राशि पूरी तरह से टैक्स फ्री होती है।



  1. कर्मचारी जिन पर ग्रेच्युटी एक्ट 1972 लागू होता है –  इस केस में निम्न में जो भी सबसे कम होगा टैक्स फ्री होगा – (a) Last Drawn Salary * Period of Service *15 /26,  (b ) 10 लाख, (3) प्राप्त ग्रेच्युटी की राशि।

इसको समझने के लिए एक उदाहरण देखते है – मान लीजिये आप किसी कंपनी में पिछले 16 वर्ष 7 महीने से काम कर रहे है और आपकी सैलरी Rs. 50,000 प्रति महीना है और आपको प्राप्त ग्रेच्युटी की राशि 6 लाख है। तो इस केस में टैक्सेबल ग्रेच्युटी की राशि होगी –

  1. Rs. 50,000*17*15 /26 = Rs. 4,90,385
  2. Rs. 10,00,000
  3. Rs. 6,00,000

उपरोक्त तीनो में सबसे कम राशि Rs. 4,90,385 है तो यह राशि करमुक्त होगी और टैक्सेबल ग्रेच्युटी की राशि होगी Rs. 6,00.000 – Rs. 4,90,385 = Rs. 1,09,615 ।

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3. कर्मचारी जिन पर  ग्रेच्युटी एक्ट 1972 लागू नहीं होता है – इस केस में निम्न में जो भी सबसे कम होगा टैक्स फ्री होगा – (a) Average Last 10 months Salary * Completed year of Service *15 /30 ,  (b ) 10 लाख, (3) प्राप्त ग्रेच्युटी की राशि।

यहाँ Salary में ( बेसिक सैलरी+ dearness Allowance (If forming part of retirement benefit)+ कमीशन ऑन फिक्स्ड % ऑफ़ टर्नओवर achieved by एम्प्लोयी ) को शामिल किया जायेगा और completed year of Service में पूरे वर्ष की सेवा को 1 वर्ष माना जायेगा और 12 महीने से कम पीरियड को छोड़ दिया जायेगा, उदाहरण के लिए यदि आपने 16 वर्ष 11 महीने काम किया है तो इसे 16 वर्ष ही माना जायेगा।

टैक्सेबल ग्रेच्युटी की राशि  “सैलरी हेड”  में टैक्सेबल होती है, लेकिन कर्मचारी की मृत्यु होने पर उसके उत्तराधिकारियों को प्राप्त ग्रेच्युटी की राशि ” income from other source”  में टैक्सेबल होगी।

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