What Is Tds In Hindi

What is TDS In Hindi –  TDS सरकार द्वारा टैक्स लेने  का इनडायरेक्ट तरीका है जिससे टैक्स की चोरी को रोका  जाता है। TDS kya hai, TDS ka Full Form और टीडीएस क्यों काटा जाता है व टीडीएस की रिफंड प्रोसेस क्या है, इन सबके बारे में हम इस आर्टिकल में चर्चा करेंगे।

TDS Kya Hai

TDS ka full Form Tax deducted at source (TDS) है। TDS का सिंपल सा मतलब है की आपकी इनकम का कुछ परसेंटेज आपको इनकम का पेमेंट करने वाले (Payer ) द्वारा काटा जाता है। Payer को Deductor और आपको Deductee के नाम से भी जाना जाता है।



Deductor द्वारा टीडीएस काटने के बाद टीडीएस राशि सरकार के खाते में में जमा की जाती है। Deductor द्वारा काटे गए टीडीएस को आपके द्वारा आपकी इनकम टैक्स रिटर्न में दिखाना चाहिये। अगर Deductor द्वारा टीडीएस समय पर सरकार को जमा नहीं करवाया जाता तो Deductor पर इंटरेस्ट और पेनल्टी लग सकते है।

Deductor द्वारा Deductee को सर्टिफिकेट ( फॉर्म 16 /16 A ) जारी किया जाता है जिसमे काटे गए टीडीएस की पूरी डिटेल रहती है।अगर Deductee की इनकम टैक्सेबल इनकम से कम है तो Deductee सम्बन्धित A.Y. में Itr फाइल करके रिफंड क्लेम कर सकता है। जैसे F.Y. 2017-18  में आपकी  सैलरी से इनकम है और वह Rs. 250000 से कम है तो आप A.Y. 2018-19 की Itr फाइल करके काटे गए डीएस का रिफंड क्लेम कर सकते है।

इनकम टैक्स की कैलकुलेशन और रेट्स के लिए आप Income Tax kya Hai Aur Income Tax Ki Rates पढ़ सकते है।

टीडीएस कई तरह के पेमेंट्स पर काटा जाता है जैसे- Salary, Interest, Dividend, Commission, Professional Fees, Rent, Brokerage, Contract Payments आदि। Example के लिए आप एक बिजनेसमैन है और आप अपने एम्प्लाइज को सैलरी का पेमेंट करते है तो आपको पेमेंट के समय सैलरी पर टीडीएस काटना पड़ेगा और बैलेंस पेमेंट उनको करना पड़ेगा।

आगे हम आर्टिकल What Is Tds In Hindi में हम सैलरी पर टीडीएस और टीडीएस की कैलकुलेशन के बारे में चर्चा करेंगे।

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Tds on Salary (सेक्शन 192)

सेक्शन 192 में एम्प्लायर द्वारा अपने एम्प्लाइज को दी जाने वाली सैलरी पर टीडीएस काटा जाता है। सैलरी पर टीडीएस काटने के लिए बेसिक कंडीशन है कि एम्प्लायर और एम्प्लाइज का रिलेशन होना चाहिये।

जैसे किसी कंपनी के डायरेक्टर को कंपनी द्वारा दिये जाने वाले पेमेंट पर इस सेक्शन में टीडीएस नहीं काटा जायेगा, क्योकि डायरेक्टर को एम्प्लाइज नहीं माना जाता है। फर्म के पार्टनर को दी जाने वाली सैलरी पर भी इस सेक्शन में टीडीएस नहीं काटा जायेगा क्योकि पार्टनर्स की सैलरी बिज़नेस एंड प्रोफेशन हेड में टैक्सेबल होती है।

सैलरी पर टीडीएस काटा जायेगा यदि आपकी इनकम बेसिक Exemption  लिमिट से ज्यादा है, लेकिन आपको जो भी Exemption/Allowances मिलते है उनकी छूट दी जाएगी, इसके लिए आपको एक्सेम्पशन का प्रूफ एम्प्लायर को जमा करवाना होगा।

और यदि आपकी इनकम बेसिक एक्सेम्पशन लिमिट से कम है या आपकी इनकम कम रेट से टैक्सेबल है तो आप करनिर्धारण अधिकारी से सर्टिफिकेट प्राप्त कर  सकते है कि आपकी इनकम टैक्सेबल नहीं है या कम रेट से टैक्सेबल है। यदि करनिर्धारण अधिकारी सन्तुष्ट  हो जाता है कि आपकी इनकम टैक्सेबल नहीं है या कम रेट से टैक्सेबल है तो वो आपको सर्टिफिकेट जारी कर देगा जिसके हिसाब से आपकी इनकम पर टीडीएस काटा जायेगा।

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एम्प्लायर द्वारा सैलरी पर टीडीएस काटने के लिए सबसे पहले वर्ष की शुरुआत में एम्प्लोयी की इनकम का अनुमान लगाया जाता है और एम्प्लोयी को उसके द्वारा किये जाने वाले इन्वेस्टमेंट के बारे में डिक्लेरेशन लिया जाता है। 1 जून 2016 से यह अनिवार्य हो गया है कि employee फॉर्म  12 BB  में उसके द्वारा लिए जाने वाले बेनिफिट जैसे – HRA / LTC/ होम लोन पर ब्याज/ और अन्य डिडक्शन के बारे में Employer को डिटेल जमा करवाये।

एम्प्लोयी की इनकम का अनुमान लगाने के लिए उसकी दूसरी इनकम को भी शामिल किया जाता है और यदि हाउस प्रॉपर्टी से हानियां है तो उन्हें भी ध्यान में रखा  जाता है। यदि एम्प्लायर द्वारा काटे गए टीडीएस में कोई अंतर आता है तो वह बाद में अधिक या कम रेट से टीडीएस काट कर अंतर का एडजस्टमेंट कर सकता है।


Computation of TDS on Salary

एम्प्लायर द्वारा सैलरी पर टीडीएस काटने के लिए उस फाइनेंसियल ईयर के लिए एवरेज टैक्स रेट निकाली जाती है जो कि सभी एम्प्लाइज के लिए अलग – अलग होती है। इसको समझने के लिए एक उदाहरण देखते है –

आपकी सैलरी ₹60000 प्रति महीना है और आप इंटरेस्ट से भी ₹200000 कमाते हो इसके अलावा आपके पास दो हाउस जिसमे से एक में आप खुद रहते है और एक को किराये  पर चला रखा है जिन पर आपको ₹100000 ( होम लोन इंटरेस्ट ) और ₹200000 की हानियां है। इसके अलावा आपको बिज़नेस से ₹50000  की हानि हो रही है। और आपके पास 80 सी की ₹100000 की डिडक्शन उपलब्ध है। इस केस में आपकी सैलरी पर टीडीएस की कैलकुलेशन –

Particular
Income From Salary (60000*12) 720000
Loss From House Property (100000+200000 )

Loss From Business

(-)300000

Not Considered

420000
Income From other source

–         Interest income

200000
Gross Total Income 620000
Less : 80 C Deduction 100000
Net Income 520000

 

Tax on Total Income
Upto ₹ 2,50,000 Nil
2,50,000 to 5,00,000 @ 5% 12500
5,00,000 to 5,20,000 @ 20% 4000
Total 16500
Add : EC & SHEC @ 3% 495
Total Tax Payable 16995

 

Average Rate of Tax 16995*100/720000
= 2.36%

 

एम्प्लायर द्वारा हर महीने एम्प्लोयी की सैलरी में से 2.36 % की रेट से टीडीएस जायेगा। यानि Rs 1416 (Rs 60000 * 2.36 % )

Note : A.Y. 2018-19 से 10 % की रेट के बजाय 5 % के रेट से टैक्स लगाया जायेगा।

एवरेज रेट से टैक्स काटने के लिए एम्प्लायर को एम्प्लोयी का पैन नंबर प्राप्त करना चाहिये और अगर एम्प्लोयी के पास पैन नंबर नहीं है तो एम्प्लायर द्वारा 20 % की रेट से टीडीएस काटा जायेगा।

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Penalties

एम्प्लायर (Deductor) द्वारा काटे गए टीडीएस को देय तिथि से पहले सेंट्रल गवर्नमेंट के खाते में जमा करवाना पड़ेगा और देय तिथि के भीतर ही अपनी टीडीएस Return को फाइल करना पड़ेगा ऐसा नहीं करने पर एम्प्लायर पर इंटरेस्ट और पेनल्टी लगाए जा सकते है। इसके अलावा एम्प्लायर को उस अमाउंट की टैक्स में छूट प्राप्त नहीं होगी जिस पर टीडीएस काटा नहीं गया है या टीडीएस काटने  के बाद जमा नहीं करवाया गया है। एम्प्लायर पर Rs 200 प्रति दिन के हिसाब से जब तक टीडीएस जमा नहीं करवाया  जाता है फीस लगाई जायेगी और minimum Rs 10000 से अधिकतम Rs 100000 तक की पेनल्टी लग सकती है।

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यदि देय तिथि को छुट्टी का दिन है तो टीडीएस एम्प्लायर द्वारा उसके अगले दिन जमा करवाया जा सकता है। टीडीएस काटने के लिए एम्प्लायर के पास TAN नंबर ( Tax Identification number ) होना जरुरी है।

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If Salary Received From More Than One Employer

यदि एम्प्लोयी एक से अधिक एम्प्लायर के यहाँ काम करता है तो वह किसी भी एक एम्प्लायर को सभी एम्प्लायर से प्राप्त सैलरी और डिडक्शन की डिटेल दे सकता है और उस एम्प्लॉयर द्वारा सभी एम्प्लायर से प्राप्त सैलरी को ध्यान में रखते हुए टीडीएस काटा जायेगा। Employee द्वारा यह डिटेल फॉर्म 12 B में दी जायेगी।

और यदि एम्प्लोयी किसी एम्प्लायर के यहाँ वर्ष के बीच में जॉइन करता है तो वह पिछले एम्प्लायर के यहाँ प्राप्त सैलरी और टीडीएस के बारे में नए एम्प्लायर को निर्धारित फॉर्म (12 B) में डिटेल देगा और नए एम्प्लायर द्वारा पूर्व एम्प्लायर से प्राप्त सैलरी को एवरेज टैक्स रेट की कैलकुलेशन में शामिल किया जायेगा और काटे गए टीडीएस की छूट प्रदान करेगा।

फॉर्म 12 B को एम्प्लायर को जमा करवाने के बाद एम्प्लायर को फॉर्म में दी गयी डिटेल को कंसीडर करना जरुरी हो जाता है।

इसके अतिरिक्त यदि एम्प्लोयी को Arrears प्राप्त होता है तो उसकी सेक्शन 89 में रिलीफ प्राप्त होती है। इसके लिए एम्प्लोयी को निर्धारित फॉर्म में एम्प्लायर को डिटेल देनी होगी और एम्प्लायर सेक्शन 89 की रिलीफ का टीडीएस की कम्प्यूटेशन में ध्यान रखेगा।


Tds Refund Process

जब एम्प्लोयी की इनकम पर अधिक टीडीएस काट लिया जाता है या एम्प्लोयी की इनकम पर टीडीएस काट लिया  जाता है लेकिन एम्प्लोयी की इनकम टैक्सेबल लिमिट से कम है तो एम्प्लोयी द्वारा Return फाइल करके रिफंड क्लेम किया जा सकता है। रिफंड क्लेम करने के लिए एम्प्लोयी को सबसे पहले एम्प्लायर द्वारा दिए गए सर्टिफिकेट ( फॉर्म 16 – सैलरी के मामले में ) में टीडीएस की डिटेल को फॉर्म 26 AS से मिलानी चाहिये और जाँच करनी चाहिये कि जितना टीडीएस काटा गया है वह फॉर्म 26 AS में शो कर रहा है या नहीं । यह भी पढ़े Income Tax Return ko Due Date Par File Nahi Karne Ke disadvantages & Due Dates

यदि फॉर्म 26 AS कम टीडीएस दिखला रहा है तो इसका मतलब है कि एम्प्लायर ने अभी तक टीडीएस जमा नहीं करवाया है या एम्प्लायर द्वारा आपके पैन नंबर गलत डाले गए है। इसके लिए आपको एम्प्लायर से बात करनी चाहिए।

लेकिन यदि एम्प्लायर द्वारा टीडीएस जमा नहीं करवाया गया तो आप उस इनकम पर टैक्स देने के लिए उत्तरदायी नहीं होंगे जिस पर एम्प्लायर द्वारा टीडीएस  काटा लिया गया है। इसके लिए एम्प्लोयी को टीडीएस डिडक्शन के प्रूफ अपने पास रखने चाहिये जैसे कि फॉर्म 16, सैलरी स्लिप आदि। इसके अलावा आप करनिर्धारण अधिकारी को इसके सम्बन्ध में लिख सकते है।

इसलिए Return फाइल करने से पहले अपने फॉर्म 26 AS को जरूर चेक करे। यदि एम्प्लोयी को फॉर्म 16 जारी नहीं किया गया है तो एम्प्लोयी फॉर्म 26 AS में दी गयी डिटेल के आधार पर भी टीडीएस का रिफंड क्लेम कर सकता है।

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