scrutiny assessment under section 143 of income tax act – इनकम टैक्स डिपार्टमेंट कई तरह के Taxpayers को उनकी इनकम टैक्स रिटर्न फाइल करने के बाद भी इनकम टैक्स नोटिस जारी कर देता है। इस इनकम टैक्स नोटिस में इनकम टैक्स डिपार्टमेंट आपसे कोई भी सूचना मांग सकता है।

इन्ही इनकम टैक्स नोटिस में से एक नोटिस है “income tax scrutiny notice “. स्क्रूटिनी असेसमेंट में 2 सेक्शन कवर होते है, पहला सेक्शन 143 (2) जिसमे आपको स्क्रूटिनी शुरू करने का नोटिस दिया जाता है और दूसरा section 143 (3) इस सेक्शन में आपके स्क्रूटिनी केस के सेटलमेंट का आर्डर दिया दिया जाता है।


आपके द्वारा इनकम टैक्स डिपार्टमेंट को दी गयी सूचना के आधार पर ही आपके केस के सेटलमेंट का आर्डर दिया जाता है। यदि आप अपनी इनकम टैक्स रिटर्न में दी गयी किसी सूचना के सम्बन्ध में कोई supporting document इनकम टैक्स ऑफिसर को सबमिट नहीं कर पाते है, तो इनकम टैक्स ऑफिसर आपके केस में उस सूचना को सही नहीं मानेगा।

आज के आर्टिकल (scrutiny assessment under section 143 of income tax act) में हम स्क्रूटिनी असेसमेंट के बारे में चर्चा करेंगे।

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स्क्रूटिनी असेसमेंट क्या है ? What is income tax scrutiny assessment ? 

Scrutiny assessment में इनकम टैक्स ऑफिसर आपके द्वारा फाइल की रिटर्न में क्लेम किये गए दावों की correctness को जाँचता है।

इनकम टैक्स ऑफिसर देखता है कि आपने जो रिटर्न फाइल की है उसमे आपने सही इनकम रिपोर्ट की है, उचित खर्चे क्लेम किये है, Actual इनकम टैक्स डिडक्शन का बेनिफिट लिया है और इनके आधार पर सही टैक्स का भुगतान किया है।

जब भी आप अपनी इनकम टैक्स रिटर्न फाइल करते है तो उसमे आप अपनी इनकम रिपोर्ट करते है और उस इनकम के आधार पर ही टैक्स देते है। लेकिन जब इनकम टैक्स ऑफिसर को आपकी रिटर्न में किसी भी तरह का कोई संदेह होता है, तो वह आपको सेक्शन 143 (2) में एक नोटिस issue करेगा और आपको आपकी इनकम टैक्स रिटर्न में रिपोर्ट की गयी डिटेल्स के बारे में supporting document प्रस्तुत करने के लिए कहेगा ।

आपके द्वारा प्रस्तुत किये गए डाक्यूमेंट्स की जाँच इनकम टैक्स ऑफिसर द्वारा की जाती है। इसी पूरी प्रोसेस को इनकम टैक्स एक्ट में ” scrutiny assessment ” के नाम से जाना जाता है।

इनकम टैक्स में स्क्रूटिनी असेसमेंट क्यों किया जाता है ? Why scrutiny assessment under section 143 of income tax act –

इनकम टैक्स ऑफिसर जब भी किसी करदाता को “scrutiny assessment ” का नोटिस जारी करता है, तो उसके पास इसका कोई वैलिड काऱण होता है।

Scrutiny assessment के नोटिस आने के कई कारण हो सकते है, जिनमे से कुछ कारणों के बारे में यहाँ चर्चा करेंगे –

  • यदि आप हर वर्ष अपनी इनकम टैक्स रिटर्न फाइल करते है लेकिन किसी वर्ष की रिटर्न में अपनी पिछली इनकम टैक्स रिटर्न्स की तुलना में काफी कम इनकम रिपोर्ट करते है या काफी अधिक loss क्लेम करते है।
  • आपने अपनी Income tax return में जो टीडीएस क्रेडिट क्लेम कि है वह फॉर्म 26 AS से match नहीं करती।
  • आप अपनी टैक्स फ्री इनकम को अपनी रिटर्न में शो नहीं करते है। टैक्स फ्री इनकम पर कोई टैक्स नहीं लगता, लेकिन reporting purpose से इसे अपनी income tax return में दिखाना जरुरी है।
  • फिक्स्ड डिपाजिट से होने वाली इनकम को इनकम टैक्स रिटर्न में नहीं दिखाने से भी आपको scrutiny assessment का नोटिस मिल सकता है। सामान्य तौर पर बैंक फिक्स्ड डिपाजिट पर दिए गए ब्याज पर 10 % की rate से टीडीएस काट लेता है, लेकिन यह ब्याज आप की स्लैब रेट के हिसाब से टैक्सेबल होगा। यदि आप 20 % या 30 % की स्लैब रेट में आते है, तो इस केस में बैंक द्वारा कम टीडीएस काटा गया और आपने भी अपनी फिक्स्ड डिपाजिट की इनकम रिपोर्ट नहीं की ।
  • यदि आप अपनी इनकम टैक्स रिटर्न में कुछ ज्यादा ही amount का रिफंड क्लेम करते है।
  • आप किसी तरह के high value transaction करते है, जैसे क्रेडिट कार्ड के बड़े बिल का भुगतान, अधिक वैल्यू के शेयर्स या म्यूच्यूअल फण्ड में इन्वेस्टमेंट या प्रॉपर्टी का विक्रय आदि।

इन ट्रांजेक्शन के अलावा भी काफी ऐसे ट्रांजैक्शन हो सकते है जिनके आधार पर आपको section 143 (2) में scrutiny assessment का नोटिस मिल सकता है।


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Section 143(2) में Scrutiny Assessment का नोटिस देने की टाइम लिमिट क्या है ?

इनकम टैक्स डिपार्टमेंट द्वारा दिए जाने वाले कोई भी नोटिस valid नहीं रहेंगे, अगर ये एक निर्धारित समय सीमा के बाद जारी किये जाते है।

इनकम टैक्स की scrutiny assessment के नोटिस जिस फाइनेंसियल ईयर में आपने अपनी इनकम  टैक्स रिटर्न फाइल की है के समाप्त होने के 6 महीने के भीतर जारी किया जाना जरुरी है।

जैसे – अगर आपने अगस्त 2018 में अपनी Income tax reutrn फाइल की है तो मार्च 2019 समाप्त होने के 6 महीनो के भीतर आपको section 143(2) में scrutiny assessment का नोटिस जारी किया जा सकता है, यानि 30 सितम्बर 2019 तक।

लेकिन सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि आपको जारी किया गया यह नोटिस 30 सितम्बर 2019 तक आपको मिलना चाहिए। अगर इनकम टैक्स ऑफिसर 28 सितम्बर 2019 को नोटिस जारी करता है और आपको यह नोटिस 1 अक्टूबर 2019 को मिलता है, तो यह नोटिस वैलिड नहीं होगा।

Scrutiny assessment कितने टाइप्स के होते है ? types of scrutiny assessment –

स्क्रूटिनी असेसमेंट 3 टाइप्स के होते है, –

  1. Limited scrutiny,
  2. Complete scrutiny,
  3. Manual scrutniy .

जब भी scrutiny assessment का नोटिस दिया जाता है, तो उसमे यह बताया जाता है कि आपका केस limited scrutiny के लिए सेलेक्ट किया गया है या complete scrutiny के लिए। जब भी limited scrutniy के लिए नोटिस दिया जाता है तो उसमे उस कारण को भी बताया जाता है, जिसके लिए आपको नोटिस issue किया गया है।

limited scrutiny के केस में जिस कारण से आपको नोटिस दिया गया है, सिर्फ उसी से सम्बन्धित डाक्यूमेंट्स आपसे मांगे जायेंगे। लेकिन यदि जाँच के दौरान 5 लाख से भी अधिक इनकम ऐसी निकलती है, जिस पर टैक्स नहीं लगाया गया था, तो इनकम टैक्स ऑफिसर limited scrutiny को complete scrutiny में बदल सकता है।

लेकिन, दिल्ली, मुंबई, चेन्नई, कोलकाता, बेंगलरू, हैदराबाद और अहमदाबाद के लिए यह लिमिट 10 लाख होगी। साथ ही इन शहरों में scrutiny questions को email पर भी जवाब देने की सुविधा दी गयी है।

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