GST Bill in Hindi – जीएसटी को लागू करने से पहले जो भी Indirect टैक्सेस चलन में थे उन सभी में टैक्सेबल इवेंट अलग अलग थे जैसे गुड्स के निर्माण पर, विक्रय पर और सर्विसेज को प्रदान करने पर आदि।  लेकिन GST को लागू करने के बाद यानि 1 जुलाई 2017 के बाद टैक्सेबल इवेंट गुड्स & सर्विसेज या दोनों की सप्लाई पर निर्भर करता है। अर्थात गुड्स & सर्विसेज या दोनों की सप्लाई होगी तो GST लगेगा अन्यथा नहीं।

इसके अलावा जीएसटी में किस प्रकार का टैक्स लगेगा यह भी सप्लाई के प्रकार पर ही डिपेंड करेगा जैसे – यदि सप्लाई स्टेट के भीतर होगी तो CGST & SGST और यदि स्टेट के बाहर होगी तो IGST लगेगा ।

इसलिए GST को समझने के लिए सप्लाई का कॉन्सेप्ट समझना बहुत जरुरी है।

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What is Supply Under Gst – gst bill in hindi

  1. सप्लाई में एक पर्सन के द्वारा बिज़नेस के सम्बन्ध में या बिज़नेस को आगे बढ़ाने के लिए गुड्स और/या सर्विसेज या दोनों की सप्लाई के सभी प्रकार को एक प्रतिफल के लिए करना या करने के लिए सहमत होना जिसमे Sale, Barter, Exchange, License, Rental, Lease or Disposal को शामिल किया गया है।
  2. सर्विसेज को प्रतिफल के बदले Import करना भी सप्लाई में शामिल किया गया है चाहे ऐसी Import की गयी सर्विसेज बिज़नेस के सम्बन्ध में या बिज़नेस को आगे बढ़ाने के लिए की गयी हो या नहीं। यानि कि अगर पर्सनल या चैरिटेबल उद्देश्य के लिए भी सर्विसेज को प्रतिफल के बदले Import किया जा रहा है तो उसे भी सप्लाई माना जायेगा और जीएसटी के लिए दायी होगा।

ऐसे ट्रांजैक्शन जिन्हे बिना प्रतिफल ( Consideration ) के भी सप्लाई माना जायेगा – Schedule 1

कुछ ट्रांजैक्शन ऐसे भी होते है जिनके बदले कुछ भी प्रतिफल नहीं लिया जाता है लेकिन उन्हें सप्लाई माना जायेगा और जीएसटी के लिए दायी होंगे। जैसे कि –

  1. ऐसी बिज़नेस एसेट्स का परमानेंट ट्रांसफर या डिस्पोजल करना जिन पर इनपुट टैक्स क्रेडिट ली गयी हो, तो इसे सप्लाई माना जायेगा और GST के लिए दायी होगा। चाहे यह ट्रांजैक्शन प्रतिफल के लिए हो या नहीं।
  2. रिलेटेड पर्सन या Distinct पर्सन के बीच बिना प्रतिफल के भी की गयी गुड्स और/ या सर्विसेज या दोनों की सप्लाई जीएसटी के लिए दायी होगी। यदि स्टॉक ट्रांसफर या ब्रांच ट्रांसफर किया जाता है तो यह ट्रांजैक्शन भी जीएसटी के लिए दायी होगा यदि वहाँ पर अलग अलग रजिस्ट्रेशन नंबर लिए गए है।
  3. प्रिंसिपल और एजेंट के बीच बिना प्रतिफल के किये गए ट्रांजैक्शन भी जीएसटी के लिए दायी होंगे। प्रिंसिपल और एजेंट के बीच किये गए ट्रांजक्शन – (a) – प्रिंसिपल के द्वारा एजेंट को गुड्स की सप्लाई करना जहाँ एजेंट उन गुड्स को प्रिंसिपल के Behalf पर Undertake करता है। (b) – एजेंट के द्वारा प्रिंसिपल को गुड्स की सप्लाई करना जहाँ एजेंट गुड्स को प्रिंसिपल के Behalf पर प्राप्त करता है।

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कुछ सप्लाई को सप्लाई ऑफ़ गुड्स या सप्लाई ऑफ़ सर्विसेज माना जायेगा – Schedule II

  1. यदि किसी सप्लाई में गुड्स का Title ट्रांसफर ( Sale, Barter, Exchange ) हो जाता है, तो इसे सप्लाई ऑफ़ गुड्स माना जायेगा। और यदि किसी सप्लाई में बिना Title का ट्रांसफर किये गुड्स या गुड्स पर अधिकार या गुड्स का Undivided शेयर ट्रांसफर किया जाता है तो इसे सप्लाई ऑफ़ सर्विसेज माना जायेगा।
  2. Land को Occupy करने के लिए कोई भी Lease, Tenancy, Easement, License को सप्लाई ऑफ़ सर्विसेज माना जायेगा। और किसी भी बिल्डिंग( कमर्शियल,इंडस्ट्रियल, या रेजिडेंस कॉम्प्लेक्स ) को बिज़नेस या कॉमर्स के लिए Wholly या Partly लीज या किराये पर देना सप्लाई ऑफ़ सर्विसेज माना जायेगा।

कुछ एक्टिविटीज को न तो सप्लाई ऑफ़ गुड्स माना जायेगा और न ही सप्लाई ऑफ़ सर्विसेज माना जायेगा – Schedule III

  1. एम्प्लोयी के द्वारा एम्प्लॉयमेंट के सम्बन्ध में एम्प्लायर को सेवा देना गुड्स या सर्विसेज की सप्लाई में नहीं आएगा, इसलिए इस पर जीएसटी नहीं लगेगा। लेकिन एम्प्लायर के द्वारा एम्प्लोयी को दी गयी सेवाओं को जीएसटी के दायरे में लाया गया है। यदि एम्प्लायर के द्वारा एम्प्लोयी को एक वर्ष में 50000 तक का गिफ्ट दिया जाता है, तो यह Exempt होगा और उस पर कोई जीएसटी नहीं लगेगा लेकिन उन गिफ्ट पर प्राप्त की गयी इनपुट टैक्स क्रेडिट को रिवर्स करना पड़ेगा।
  2. कोर्ट या ट्रिब्यूनल के द्वारा दी गयी सेवाएं जीएसटी से बाहर है।
  3. संसद, विधानसभा, पंचायत, नगरपालिका और दूसरे लोकल ऑथोरिटी के मेंबर्स के द्वारा किये गए कार्य।
  4. Funeral, Burial, Cremation or Mortuary की सेवायें जीएसटी से बाहर है।
  5. Actionable Claims ( लाटरी, बैटिंग और गैंबलिंग के अलावा ) ।

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कम्पोजिट सप्लाई

कम्पोजिट सप्लाई नैचुरली Bundled सप्लाई होती है। कम्पोजिट सप्लाई में दो या अधिक सप्लाई दी जाती है जिसमे से एक मुख्य सप्लाई होती है।

उदाहरण के लिए – गुड्स को पैक किया गया और insurance के साथ ट्रांसपोर्ट कर दिया गया। इस सप्लाई में गुड्स, पैकिंग मैटेरियल, ट्रांसपोर्ट & Insurance की एक कम्पोजिट सप्लाई है, तो इस केस में गुड्स की सप्लाई को मुख्य सप्लाई माना जायेगा और उसके हिसाब से जीएसटी की रेट का निर्धारण किया जायेगा।

मिक्स्ड सप्लाई 

मिक्स्ड सप्लाई का मतलब होता है कि दो या अधिक गुड्स /सर्विसेज की सप्लाई जिन्हे कम्पोजिट सप्लाई नहीं कहा जा सकता है। यानि की यह सप्लाई नैचुरली Bundled नहीं होती है।

उदाहरण के लिए – एक पैकेज की सप्लाई जिसमे Canned Food, Sweet, Chocolate, Cakes, Dry fruits, और Juice है तो इसे मिक्स्ड सप्लाई माना जायेगा, क्योकि इस पैकेज का प्रत्येक आइटम अलग से सप्लाई किया जा सकता है और ये आइटम्स एक दूसरे पर निर्भर भी नहीं है।  मिक्स्ड सप्लाई में इन आइटम्स की सबसे अधिक रेट आधार पर जीएसटी लगाया जायेगा।

Other Point – gst bill in hindi

गुड्स और/ या सर्विसेज या दोनों की सप्लाई सप्लायर के बिज़नेस के सम्बन्ध में होनी चाहिये न कि गुड्स या सर्विसेज के प्राप्तकर्ता  के के बिज़नेस के लिए।  यानि कि सप्लायर गुड्स या सर्विसेज की सप्लाई के बिज़नेस में नहीं है तो उस पर जीएसटी नहीं लगेगा।

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