gst composition scheme in hindi – जीएसटी सिस्टम में सप्लाइज के रिकार्ड्स मेन्टेन करना और हर महीने रिटर्न फाइल करना एक बिजनेसमैन  के लिए काफी जटिल समस्या है। एक बिजनेसमैन हमेशा यही चाहता है कि उसका ज्यादा से ज्यादा ध्यान उसके बिज़नेस की तरफ हो न कि टैक्स की कैलकुलेशन में। और जीएसटी सिस्टम में टैक्स कैलकुलेशन की process थोड़ी जटिल होने से कारोबारियों को बिज़नेस करने में कठिनाई का अनुभव करना पड़ रहा है।

टैक्स की कैलकुलेशन की प्रोसेस को आसान और रिकार्ड्स को मेन्टेन करने की समस्या से कारोबारियों को मुक्ति देने के लिए जीएसटी सिस्टम में कम्पोजीशन स्कीम का concept लाया गया। कम्पोजीशन स्कीम क्या है और इससे कैसे हमें फायदा हो सकता इन सभी के बारे में आज के आर्टिकल Gst composition scheme in hindi में हम जानेंगे।


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कम्पोजीशन स्कीम क्या है – what is Gst composition scheme in hindi

कम्पोजीशन स्कीम छोटे करदाताओं को जीएसटी की भारी compliance से राहत देने के लिए लागू की गयी है। कम्पोजीशन स्कीम में रजिस्टर्ड पर्सन को उसके टर्नओवर के आधार पर एक फिक्स्ड रेट से टैक्स देना होता है। कम्पोजीशन स्कीम में रजिस्टर्ड पर्सन अपने ग्राहकों से जीएसटी कलेक्ट नहीं कर सकते और न ही अपने द्वारा भुगतान किये गए जीएसटी की इनपुट टैक्स क्रेडिट प्राप्त कर सकते है।

कम्पोजीशन स्कीम में करदाता द्वारा टैक्स इनवॉइस जारी न किया जाकर बिल ऑफ़ सप्लाई ( Bill of supply ) जारी किया जाता है और प्रत्येक बिल ऑफ़ सप्लाई पर ” composition scheme person not eligible to collect tax on supplies ” मेंशन करना पड़ता है।

कम्पोजीशन स्कीम कौन अपना सकता है –

ऐसे करदाता जिनका कुल टर्नओवर 1 करोड़ से कम है, वह कम्पोजीशन स्कीम में रजिस्ट्रेशन करवा सकते है।  North Eastern states और हिमाचल प्रदेश में यह लिमिट 75 लाख है।

कुल टर्नओवर में सभी टैक्सेबल सप्लाइज ( रिवर्स  चार्ज सप्लाइज को छोड़कर ), करमुक्त सप्लाइज, एक्सपोर्ट की गयी गुड्स एंड सर्विसेज, और ऐसे पर्सन को इंटरस्टेट सप्लाई जो की एक इनकम टैक्स पैन नंबर रखते है को शामिल किया गया है।

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ऐसे पर्सन जिनके द्वारा कम्पोजीशन स्कीम नहीं अपनायी जा सकती –

कुछ करदाता 1 करोड़ से कम टर्नओवर होने के बाद भी कम्पोजीशन स्कीम में रजिस्ट्रेशन नहीं करवा सकते है , ऐसे पर्सन है –

  1. ऐसे करदाता जो कि करमुक्त सप्लाई करते है।
  2. सर्विसेज की सप्लाई करने वाले करदाता ( रेस्टोरेंट सर्विसेज को छोड़कर )
  3. इंटर स्टेट सप्लाई करने वाले करदाता।
  4. E- commerce ऑपरेटर के माध्यम से सप्लाई करने वाले करदाता।
  5. ice cream, पान मसाला या तंबाकू के निर्माता।
  6. नॉन रेजिडेंट।

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कम्पोजीशन स्कीम में जीएसटी रेट्स –

कम्पोजीशन स्कीम में नार्मल स्कीम से कम रेट से टैक्स देना होता है।

CGST SGST TOTAL
MANUFACTURE AND TRADERS .5 % .5 %  1 %
RESTAURANTS NOT SERVING ALCOHOL 2.5 % 2.5 %  5 %

कम्पोजीशन स्कीम में कुल टर्नओवर पर इन रेट्स से टैक्स Payable होता है और कुल टर्नओवर में करमुक्त सप्लाइज को भी शामिल किया जाता है, यानि कि कम्पोजीशन स्कीम में कर मुक्त सप्लाइज पर भी टैक्स देना होता है।

कम्पोजीशन स्कीम में जमा की जाने वाली रिटर्न्स –

कम्पोजीशन स्कीम का सबसे ज्यादा बेनिफिट यह है कि इसमें करदाता को रिटर्न हर महीने फाइल करने की बजाय Quarterly फाइल करनी पड़ती है। कम्पोजीशन  स्कीम में रजिस्टर्ड प्रत्येक पर्सन को quarter के समाप्त होने के 18 दिनों के भीतर फॉर्म GSTR 4 में रिटर्न फाइल करनी पड़ेगी।




और वर्ष के समाप्त होने के बाद 31 दिसंबर तक फॉर्म 9 A में एनुअल रिटर्न फाइल करनी पड़ती है। Quarterly और Annual रिटर्न तब भी फाइल करनी पड़ेगी जब कोई भी ट्रांजेक्शन नहीं किया गया हो।  यानि कि करदाता द्वारा कोई ट्रांजेक्शन नहीं किये पर nil की रिटर्न फाइल करनी पड़ेगी।

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कम्पोजीशन स्कीम में रिवर्स चार्ज

कम्पोजीशन स्कीम में भी रिवर्स चार्ज मैकेनिज्म लागू होता है और करदाता को लागू होने वाली रेट से जीएसटी का पेमेंट करना पड़ेगा।

क्या कम्पोजीशन स्कीम में रजिस्ट्रेशन करवाना अनिवार्य है

कम्पोजीशन स्कीम एक ऑप्शनल स्कीम है यानि कि अगर करदाता कम्पोजीशन  स्कीम में रजिस्ट्रेशन करवाना चाहता है तो करवा सकता है अन्यथा नार्मल स्कीम में ही टैक्स दे सकता है। यह पूरी तरह से करदाता पर Depend करता है कि वह कम्पोजीशन स्कीम में रजिस्ट्रेशन करवाना चाहता है या नार्मल स्कीम में।

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