इनकम टैक्स एक्ट के अनुसार यदि आप बिज़नेस करते है तो कुछ शर्तो के पूरा होने पर आपको Books of Accounts रखना जरुरी होता है। लेकिन कुछ बिज़नेसमैन जो कि छोटे स्तर पर बिज़नेस करते है उनके लिए Books of Accounts रखना एक परेशानी का काम हो सकता है और इसमें उनके खर्चे अनावश्यक रूप से बढ़ भी सकते है।

इसी परेशानी को ध्यान में रखते हुए इनकम टैक्स एक्ट में छोटे बिजनेसमैन को एक स्कीम को अपनाने की सुविधा दी है जिसे Presumptive Taxation Scheme के नाम से जाना जाता है।

Presumptive स्कीम में अलग -अलग करदाता को अलग -अलग सेक्शन में कवर किया गया है जैसे कि – सेक्शन 44AD, 44 ADA & 44AE ।

Presumptive स्कीम का फायदा यह है कि इसमें आपको Books of Accounts रखने की आवश्यकता नहीं है और इसके अलावा आप अपने खातों को ऑडिट करवाने की समस्या से भी बच सकते है।

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Presumptive Taxation Scheme

इस स्कीम में आपके बिज़नेस की इनकम के Gross Receipts / Turnover के एक निश्चित % को आपकी इनकम मान लिया जायेगा और इसी इनकम पर आपको टैक्स देना होगा।

यदि आप एक बार Presumptive Taxation Scheme को अपना लेते है तो आपको अगले 5 वर्ष तक इसे Follow करना पड़ेगा। अगर आप इन 5 वर्षो में से किसी भी वर्ष में इस स्कीम को Follow नहीं करते है तो यह स्कीम आपको अगले 5 वर्षो तक उपलब्ध नहीं होगी।

उदाहरण के लिए – आपने असेसमेंट ईयर( A.Y.) 2017 -18 के लिए Presumptive Basis पर इनकम टैक्स का भुगतान किया तो अगले 5 वर्षो तक आपको इसी आधार ( Presumptive Basis ) पर टैक्स का भुगतान करना पड़ेगा। आगे आपने A .Y . 2018 -19 में इसी स्कीम के आधार पर टैक्स का भुगतान किया लेकिन A .Y . 2019 -20 में इस स्कीम को फॉलो नहीं किया,

तो ऐसे केस में आप A.Y. 2020 -21 से A.Y. 2025 -26 तक Presumptive Taxation Scheme वापस से नहीं अपना सकते और इन वर्षो में आपको Books of Accounts रखने पड़ेगी।

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Section 44 AD – बिज़नेसमेन्स के लिए

सेक्शन 44 AD छोटे बिज़नेसमैन के लिए डिज़ाइन किया गया है। छोटे बिज़नेसमैन से मतलब है कि ऐसे व्यक्ति जिनकी एक फाइनेंसियल ईयर में Total Receipts / Turnover 2 करोड से ज्यादा नहीं है।

44AD में Presumptive स्कीम को अपनाने के लिए निम्न शर्ते पूरी होनी चाहिए –

  1. सेक्शन 44 AD में केवल इंडिविजुअल, HUF और पार्टनरशिप फर्म को शामिल किया गया है यानी LLP और कम्पनीज इस स्कीम को नहीं अपना सकती है।
  2. आप भारत के निवासी होने चाहिए यानि NON – Residents के लिए यह स्कीम नहीं है।
  3. जिस बिज़नेस के लिए आप यह स्कीम अपनाना चाहते है उसका Turnover या Gross Receipts 2 करोड़ से ज्यादा नहीं होना चाहिये।
  4. यह स्कीम उन पर्सन्स के द्वारा नहीं अपनायी जा सकती है जो कि सेक्शन 10 A/ 10 AA/ 10 B/ 10 BA या 80 HH से 80 RRB तक की  डिडक्शन क्लेम करते है।

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Taxation U/S 44 AD

सेक्शन 44 AD में आपके बिज़नेस की Gross Receipts / Turnover के 8 % के बराबर आपकी इनकम मानी जाएगी और इस इनकम में से किसी भी तरह के खर्चों को क्लेम करने की अनुमति नहीं दी जाती है।

उदाहरण के लिए – आपके बिज़नेस का टर्नओवर 1 करोड़ है तो आपकी इनकम 8 लाख ( Rs. 1,00,00,000 * 8 % ) मानी जाएगी और 8 लाख पर ही टैक्स की कैलकुलेशन की जाएगी।

यदि आपके द्वारा बिज़नेस Receipts को डिजिटल मोड में प्राप्त किया जाता है जैसे कि – अकाउंट पेयी चेक, ड्राफ्ट या इलेक्ट्रॉनिक क्लेयरेंस सिस्टम से तो इस केस में आपकी इनकम Gross Receipts / Turnover  के 6 % के बराबर मानी जायेगी।

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Person Not Eligible – यह स्कीम निम्न पर्सन्स नहीं अपना सकते –

  1. Plying, Hiring, और Leasing Goods Carriage – Section 44 AE,
  2. ऐसे पर्सन्स जो की एजेंसी बिज़नेस कर रहे है,
  3. कमीशन व ब्रोकरेज की इनकम करने वाले पर्सन्स,
  4. ऐसे पर्सन्स जिनका टर्नओवर 2 करोड़ से अधिक है,
  5. प्रोफ़ेशनल पर्सन्स- Section 44 ADA ।

सेक्शन 44 ADA – प्रोफेशनल के लिए Presumptive Taxation Scheme

सेक्शन 44 ADA उन रेजिडेंट के लिए है जो कि स्पेसिफ़िएड प्रोफेशन कर रहे है और उस प्रोफेशन की Gross Receipts एक फाइनेंसियल ईयर में 50 लाख से अधिक नहीं है। स्पेसिफ़िएड प्रोफेशन में लीगल, मेडिकल, इंजीनियरिंग/आर्किटेक्ट, एकाउंटेंसी, टेक्नीकल कंसल्टेंसी, इंटीरियर डेकोरेटर और दूसरे प्रोफेशन जो कि CBDT द्वारा Notified है, शामिल किये जायेंगे।

Taxation U/S 44 ADA

इस सेक्शन में आप Presumptive Taxation Scheme तभी अपना सकते है जब आप स्पेसिफ़िएड प्रोफेशन कर रहे है और आपकी Gross Receipts 50 लाख से अधिक नहीं है।

टैक्स की कैलकुलेशन के लिए आपकी कुल Receipts के 50 % को आपकी इनकम माना जाता है और इस इनकम में से किसी भी खर्चे के कटौती की अनुमति नहीं दी जाती है। यानि की कुल Receipts का 50 % आपकी Net इनकम माना जायेगा और इस इनकम पर स्लैब रेट /फिक्स्ड रेट के हिसाब से टैक्स लगाया जायेगा।

यदि आप यह स्कीम नहीं अपनाते है तो नार्मल स्कीम में इनकम की कैलकुलेशन कर सकते है ( Total Receipts – Expenses) ।

Presumptive Taxation Scheme को अपनाने का फायदा यह है कि आपको Books of Accounts रखना जरुरी नहीं होता है।

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सेक्शन 44 AE- Transporter के लिए

यह स्कीम उन करदाताओ के लिए है जो कि Plying, Hiring, Or Leasing Goods Carriage के बिज़नेस में लगे हुए है।

इस सेक्शन में सभी पर्सन को शामिल किया गया है जैसे – इंडिविजुअल, HUF, फर्म, कम्पनी। लेकिन यह स्कीम आपके द्वारा तभी अपनायी जा सकती है जब आपके पास वर्ष में किसी भी समय 10 वाहनों से ज्यादा वाहन नहीं हों।

Taxation U/S 44 AE

इस सेक्शन में आपके द्वारा वाहन कितने समय तक रखे गए है के आधार पर इनकम कैलकुलेट की जाती है। इस स्कीम में Rs. 7500 प्रति वाहन प्रति महीने के हिसाब से इनकम मानी जाती है। यदि कोई वाहन एक महीने से कम भी रखा गया है तो इसे भी पूरा महीना माना जायेगा।

Example के लिए – आपके पास 8 ट्रक्स है और आपने 44 AE में को अपना रखा है। आपके पास यह Trucks 8 महीने और 10 दिन तक रहे तो 10 दिन को भी पूरा महीना माना जायेगा और आपकी इनकम 9 महीने के हिसाब से कैलकुलेट की जायेगी यानि कि (7500*9 * 8 Trucks ) ।


Advance Tax Liability

यदि आपने सेक्शन 44 Ad, 44 ADA, या 44 AE में अपना रखा है तो भी आपकी एडवांस टैक्स की लायबिलिटी बनी रहेगी।

लेकिन इन स्कीम्स में फायदा यह है कि आपको एडवांस टैक्स का भुगतान अलग – अलग किस्तों के बजाय सिर्फ एक क़िस्त में करना होगा यानि कि 15 मार्च से पहले।

Presumptive  Taxation Schemes के Other Features

  1. यदि आपने किसी वर्ष में इनमें से किसी स्कीम का चुनाव किया है लेकिन आगे के किसी फाइनेंसियल ईयर में आपकी इनकम इन सेक्शन में निर्धारित % से कम है तो आप इन स्कीम के चुनाव नहीं करने का निर्णय ले सकते है, लेकिन इस केस में आपको Books of Account रखनी होगी और सेक्शन 44 AB में अपने खातों की ऑडिट करवानी होगी।
  2. Presumptive Taxation Scheme को अपनाने पर किसी भी बिज़नेस Expenses (Deprecation को शामिल करते हुए ) की छूट नहीं दी जायेगी।
  3. इन सेक्शन में आपको Books of Accounts आपको रखना जरुरी नहीं है।
  4. फाइनेंसियल ईयर 2016 – 17 से पार्टनर्स को Salary/ Remuneration/ Interestके भुगतान की छूट प्राप्त नहीं होगी।
  5. अगर आपके 1 से अधिक बिज़नेस है तो यह स्कीम केवल उसी बिज़नेस के लिए लिए लागू होगी जिसके लिए आपने इनमे से किसी स्कीम का चुनाव किया है और बाकी बिज़नेस के लिए इनकम टैक्स के नार्मल provisions लागू होंगे।

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